परिवारवाद में उलझा भारतीय राजनीती
परिवारवाद में उलझा भारतीय राजनीती, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र पर सबसे बड़ा खतरा आज वंशवाद का है, जिसका अध्ययन और आलोचना करते - करते कई राजनेता और कई दल इसी के चपेट में आ गए. अक्सर यह बहस सिर्फ गाँधी परिवार के संदर्भ में होती रही है. जैसे नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी राजनीती में आए और आते हीं प्रधानमंत्री पद के दावेदार बन गए. वंशवाद हमारी राजनीती क़ो खाए जा रही है. उड़ीसा के वर्षो तक मुख्यमंत्री रहे बीजू पटनायक के पुत्र नवीन पटनायक मुख्यमंत्री हैं. शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पुत्र सुखबीर सिंह बादल पार्टी अध्यक्ष के साथ - साथ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री थे. 18 सदसीय मंत्रिमंडल में आधे दर्जन इनके रिश्तेदार थे . जम्मू कश्मीर के वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अबद्दुल्ला के पिता फारुख अबद्दुल्ला और उनके पिता शेख अबद्दुल्ला वर्षो तक कश्मीर की रियासत क़ो सँभालते रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की पुत्री महबूबा मुफ़्ती सांसद के साथ पीडीपी की अध्यक्ष भी हैं. महाराष्ट्र में राँकपा प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार अपनी सुपुत्री सुप्रिया सुले क़ो आसानी से संसद में पहुंचाने के लिए अपनी बारामती की सीट छोड़ चुके हैं, तथा भतीजा अजित पवार भी जंग -ए -मैदान में कूद गए हैं. बाला साहेब ठाकरे ने पुत्र - मोह में उद्धव ठाकरे क़ो शिव सेना का अध्यक्ष क्या बनाया भतीजा राज ठाकरे ने एक नई पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना गठित कर चाचा क़ो हीं टक्कर दे दी. 1987 में नांदेड़ से लोकसभा पहुँचे महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चौहान पूर्व मुख्यमंत्री एस बी चौहान के बेटे हैं. तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री व द्रमुक अध्यक्ष एम करूणानिधि के पुत्र एम के स्टालीन पार्टी के उस समय कोषाध्यक्ष थे तो पुत्री कानि माझी क़ो संसद में भेजने की तैयारी में थे. उनके हीं परिवार के दयानिधि मारन केंद्र में संचार मंत्री रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री तथा जद सेक्युलर प्रमुख एच डी देवगड़ा के पुत्र एच. डी. कुमार स्वामी मुख्यमंत्री रह चुके हैं तो दूसरे एच डी रवेन्ना दो बार बिजली मंत्री और सार्वजनिक मंत्री रह चुके हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह पहले विधायक थे और बाद में लोकसभा जाने के तैयारी में थे. मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री माधव राव सिंधिया तथा राजस्थान के राजेश पायलट के पुत्र सचिन पायलट तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्तमान में केंद्र सरकार में दूरसंचार मंत्री हैं . पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह भी वाडमेड से लोकसभा जाने की तैयारी में थे, वर्तमान में विधायक हैं. पूर्व सांसद सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त मुम्बई से सांसद थी. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की बेटी अगथा मेघालय के तुरा क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुनी गई थी . बिहार के दलित नेता रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान फ़िल्मी दुनिया से किस्मत आजमाने के बाद राजनीती में आए और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बन गए और संसद पहुंचने के दौड़ में शामिल हो गए. वर्तमान में चिराग पासवान केंद्र में मंत्री हैं और अपने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. राजद प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव अपनी पुत्री मिसा भारती क़ो पाटलिपुत्र से टिकट दिया और समर्पित नेता रामकृपाल यादव का टिकट काट दिया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य सारण लोकसभा से चुनाव लड़ी लेकिन संसद नहीं पहुंच सकी. लालू यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव मंत्री रह चुके हैं, तेजस्वी यादव इस समय राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में फैसला ले रहे हैं, पार्टी की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में है तेजस्वी उपमुख्यमंत्री पिछले सरकार में रह चुके हैं.बिहार के हीं रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पुरे परिवार क़ो राजनीती में सेट कर दिया स्वयं उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा का नॉमिनेशन कर दिए हैं, पत्नी क़ो विधानसभा पहुंचा दिए एवं बेटे दीपक प्रकाश क़ो बिना किसी सदन के सदस्य होते मंत्री बनवा दिए पूरा परिवार राजनीती में सेट. जितन राम मांझी केंद्र में मंत्री हैं बेटा संतोष सुमन हम यानि हिंदुस्तान आवामी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार में मंत्री हैं, इनकी पत्नी भी विधायक हैं. अब बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनितिक विरासत क़ो बचाने के लिए उनके पुत्र निशांत कुमार की एंट्री बिहार की राजनीती में हो गई है, सूत्र बता रहे हैं निशांत कुमार का उपमुख्यमंत्री बनना तय है.ऐसे हीं कितने नेता पुत्र विधानसभा में पहुँचे हैं.भुवनेश्वर में एक होर्डिंग लगी थी जिसमें बीजू पटनायक नवीन पटनायक की ओर ऊँगली दिखा रहे हैं मानो वह ध्यान दिला रहे हैं कि उनका उत्तराधिकारी उनका बेटा है. जिस तरह पंजाब में सुखबीर सिंह बादल, उप्र में अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला जम्मू - कश्मीर में , तेजस्वी यादव, चिराग पासवान, निशांत कुमार बिहार में हैं उसी प्रकार नवीन पटनायक का वंश हीं उनकी पूंजी है. वंशवाद दीमक कि तरह भारतीय राजनीती क़ो कमजोर कर रही है. दुर्भाग्य से पिछले 70- 75 वर्षों में हमारा जनतन्त्र क्रमशः व्यक्ति पूजक वंशवादी जनतन्त्र बनता गया है. इस परम्परा की शुरुआत भले हीं नेहरू - गाँधी परिवार से हुई हो, आज लगभग हर दल और विभिन्न प्रांतो में इसकी स्थानीय किस्म के दर्शन होते हैं. चर्चिल ने कहा था ' लोकतंत्र शासन की सबसे खराब प्रणालियों में से एक है लेकिन यह अपवाद स्वरूप समय - समय पर आजमाई गई अन्य शासन प्रणालियों से बेहतर है. फ्रेंकलिन रुजवेल्ट ने कहा है,' लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक अपनी पसंद क़ो व्यक्त करने वाले लोग बुद्धिमानी भरा निर्णय लेने के लिए तैयार न हो जाएँ. प्रबुद्ध नागरिक हीं लोकतंत्र के सच्चे संरक्षक हैं. हालांकि इस बात का कोई गारंटी नहीं है कि एक शिक्षित व्यक्ति अशिक्षित की तुलना में बेहतर व्यवहार करेगा. डॉ. अम्बेडकर क़ो भी लोकतंत्र के प्रति कुछ शंकायें थी, उन्होंने संविधान सभा में कहा था,' भारतीय मिट्टी जो पूरी तरह अलोकतान्त्रिक है वहाँ पर लोकतंत्र का मुलम्मा चढ़ा दिया गया है. भारत में राजनितिक लोकतंत्र है लेकिन सामाजिक लोकतंत्र नहीं है. इस संदर्भ में अम्बेडकर ने सही हीं कहा था,' सामाजिक रूप से भारतीय समाज विषमता के सिद्धांत पर विभाजित है. लेखक-शिवाजी चौधरी - अनुराग भारत मिडिया ग्रुप के प्रधान सम्पादक है, सम्पर्क : 9334375496
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