महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में गिराकर कांग्रेस ने आपातकाल के बाद एक और कलंक का टीका अपने माथे ले लिया है*—विजय कुमार सिन्हा

महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में गिराकर कांग्रेस ने आपातकाल के बाद एक और कलंक का टीका अपने माथे ले लिया है*—विजय कुमार सिन्हा

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने एक बार फिर महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात किया है। देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने वाले महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में सिर्फ 54 वोटों से हराने की साजिश रची गई। यह विपक्ष का वही चेहरा है जिसने पहले भी महिला आरक्षण का विरोध किया था।

जहां भाजपा पूरी गंभीरता और ईमानदारी से महिला सशक्तीकरण के लिए प्रयासरत है, वहीं कांग्रेस सदन में बहाने बनाकर इसे गिराने में लगी रही। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने का यह ऐतिहासिक अवसर कांग्रेस की नकारात्मक सोच के कारण हाथ से निकल गया।

कांग्रेस, राजद और सपा जैसी पार्टियों के लिए राजनीति महिलाओं के भविष्य से ज़्यादा मायने रखती है।
कांग्रेस और विपक्षी दलों की महिला विरोधी सोच का खामियाजा हमारे देश की महिलाओं को उठाना पड़ेगा। देश की महिलाओं के लिए भाजपा सत्ता के दरवाजे खोलने के लिए जी-जान से जुटी थी। 
महिलाओं के प्रति उनके इस अपराध का उत्तर जनता अवश्य देगी। देश की बहनें-बेटियां कांग्रेस को उनकी इस घृणित प्रयास के लिए कभी माफ नहीं करेंगी।

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