बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने आज इंडियन यूथ पार्लियामेंट राष्ट्रीय सत्र के 29वें राष्ट्रीय सत्र के समापन कार्यक्रम को संबोधित (Valedictory) किया
बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने आज इंडियन यूथ पार्लियामेंट राष्ट्रीय सत्र के 29वें राष्ट्रीय सत्र के समापन कार्यक्रम को संबोधित (Valedictory) किया। यह चार दिवसीय आयोजन 20 से 23 मार्च 2026 तक महर्षि व्यास सभागार, नागपुर (महाराष्ट्र) में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से आए 1000 से अधिक युवाओं ने सहभागिता की।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए माननीय अध्यक्ष ने “विकसित भारत” की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि देश का भविष्य युवाओं की सोच, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता पर निर्भर करता है।
माननीय अध्यक्ष ने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक युवा कार्यकर्ता से लेकर नौ बार विधायक बनने और वर्तमान में विधान सभा अध्यक्ष के पद तक का उनका सफर संघर्ष, समर्पण और जनसेवा का परिणाम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों को समझें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करें।
बिहार दिवस के अवसर पर उन्होंने भारतीय राजनीति में बिहार के युवाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितीन नवीन का उल्लेख करते हुए उन्हें सौंपी गई महती जिम्मेदारी को शीर्ष नेतृत्व का युवाओं के प्रति विश्वास का प्रतीक बताया। साथ ही, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को युवा सशक्तिकरण का एक असाधारण युग बताया।
उन्होंने बिहार की प्रसिद्ध युवा गायिका सह माननीय सदस्या सुश्री मैथिली ठाकुर का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की युवा एवं नारी शक्ति देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।
वर्तमान भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है, जहाँ लगभग 65% आबादी युवा है। इस जनसांख्यिकीय शक्ति का सही उपयोग तभी संभव है, जब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ। “विकसित भारत” का अर्थ केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि समावेशी समाज का निर्माण है, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान भी मिले। सरकार द्वारा संचालित Digital India, Startup India एवं Make in India जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन योजनाओं की सफलता युवाओं की सक्रिय भागीदारी और नवाचार पर निर्भर करती है।
साथ ही, सामाजिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से युवा संसद जैसे मंच युवाओं में लोकतंत्र की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह अवसर युवाओं को अपने विचार व्यक्त करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और राष्ट्रहित में भागीदार बनने की प्रेरणा देता है।
आज विश्व के समक्ष भ्रष्टाचार, पर्यावरण संकट और सामाजिक असमानता जैसी कई गंभीर चुनौतियां हैं, जिनके समाधान के लिए युवाओं को सक्रिय नागरिक के रूप में आगे आना होगा।
संबोधन के अंतिम पड़ाव पर माननीय अध्यक्ष ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रेरित किया—
“उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”
तत्पश्चात, उन्होंने युवाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर सर्वश्री प्रो. मदन मोहन झा (कुलपति, जेआरआर संस्कृत विश्वविद्यालय), आशुतोष जोशी (राष्ट्रीय संयोजक, इंडियन यूथ पार्लियामेंट), हितेश शंकर (संपादक, पांचजन्य) एवं प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण (कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय) सहित कई गणमान्य भी उपस्थित रहे।
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