सेल्फी की शौक, सनक या बीमारी
किसी भी तकनीक का असंयमित इस्तेमाल उसे अभिशाप में बदल देता है. सेल्फी का शौक कुछ लोगों के लिए सनक में तब्दील होता जा रहा है. दुस्साहसिक तस्वीरें खींचने के चक्कर में आए दिन मौतें और दुर्घटनाएं हो रही है. तकनीक ने जीवन क़ो जितना सरल किया है उतनी हीं उलझने भी दी है मोबाइल भी एक तकनीक हीं है इसमें लगा कैमरा शुरू में एक सौगात की तरह हमारे जीवन में आया था, लेकिन कुछ लोगों में सेल्फी का जूनून आज हद से गुजर रहा है. सोशल मिडिया में अजब - गजब तस्वीरें साझा करने की मानसिकता लोगों पर हावी हो रही है. बेवजह के प्रदर्शन की इस होड़ में व्यवहार और शिष्टाचार दोनों हीं भुलाए जा रहे हैं. समाज में सेल्फी के नाम पर बढ़ रही असंवेदनशीलता वाकई चिंतनीय है. घर, दफ्तर, मंदिर, सड़क, चलती ट्रेन, गुसलखाना और यहाँ तक की शोकसभा तक में लोग सेल्फी लेने के फिराक में रहते हैं. आज के दौर में इंसान क़ो आखिर हुआ क्या है ? वह कैसी सनक है कि न समय देखा जा रहा है और न हीं अवसर. आत्ममुग्धता इतनी की सेल्फी खींच कर उसे सोशल मिडिया पर डाल कर लोगों की ( आभासी ) तारीफेँ बटोरने के सिवा और कुछ सूझता हीं नहीं है. हाल हीं में पटना में परीक्षा देकर घर जा रही छात्रा ट्रेन के दरवाजा पर सेल्फी लेने के चक्कर में गंगा नदी में गिर गई, हालांकि उसे मछुआरों ने बचा लिया. देखने में आ रहा है कि इन दिनों सेल्फी की सनक सिर्फ युवाओं में हीं नहीं, बल्कि सभी वर्ग के लोगों पर सिर चढ़कर बोल रहा है. सही मायने में देखा जाए तो सेल्फी के पीछे मनोविज्ञान का शब्द ' नसीसीज्म ' यानि कि आत्ममुग्धता है. सेल्फी अब सेल्फ - लव बन गया है. क्योंकि इस लत के शिकार लोग केवल खुद के बारे में सोचते हैं. यह व्यवहार की वह अति है जिसमें अतिविशिष्ट समझने और तारीफेँ बटोरने का रोग लग जाता है. ऐसी हीं एक घटना में चट्टान पर खडे होकर सेल्फी खींचते समय तेज हवा के झोंके से संतुलन बिगड़ने पर एक व्यक्ति समुद्र में जा गिरा. सेल्फी की इस खेल में जान हीं गँवानी पड़ी. इसी तरह की एक दर्दनाक घटना में एक महिला ने सेल्फी लेने के चक्कर में गलती से अपने सिर में गोली मार ली वह पिस्टल (पिसतौल ) से अपने सिर पर लगाकर सेल्फी लेने की कोशिश कर रही थी. कुछ समय पहले ऐसी भी एक खबर सुर्खियों में आई थी जब अमेरिका में एक स्टूडेंट क़ो कंधे में गोली लगी तो उसने मेडिकल हेल्प मांगने की जगह खून से सने कंधे के साथ सेल्फी खींचकर सोशल साईट पर पोस्ट करना ज्यादा जरूरी समझा.एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महानगरों की युवतियाँ दिन में कम - से -कम अड़तालिस मिनट से लेकर सप्ताह में पांच घंटे तक का समय सेल्फी लेने में गुजारती है. वेबसाइट ' मीरर डॉट को डॉट युके ' के मुताबिक अच्छी सेल्फी लेने में इतना समय मेकअप, सही रौशनी और सही कोण तलाशने में चला जाता है. सवाल यह है कि यह कैसी पहचान की समस्या है, जो अनमोल समय और ऊर्जा दोनों खा रहा है. साथ हीं भावनात्मक और मानसिक तनाव मिलता है वह अलग. इतना हीं नहीं ओहयो स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं ने भी माना है कि जो लोग हद से ज्यादा सेल्फी लेने और उन्हें साझा करने के शौक़ीन हैं वे एक तरह के मनोरोगी हैं. लोगों की नजर में आने और उनका ध्यान खींचने की जबरदस्त ख्वाहिश ने इस समस्या क़ो जन्म दिया है.एक शोध के मुताबिक कैमरा - फोन के आने के बाद मनोचिकित्सकों के यहाँ आने वाले हर तीन में से दो मरीज ऐसे हैं जो बॉडी डिसमोफिक डिसऑर्डर (शरीर अपरूपता विकार ) की शिकायत करते हैं यानि वे खुद किस तरह दीखते या दिखती है, इसे लेकर अत्यधिक चिंता होती है. निश्चित रूप से पल - पल में खुद की तस्वीर क्लिक कर पोस्ट करने या डाऊनलोड करने की आदत खतरे की घंटी है. यह कुल मिलाकर मानसिक तनाव और कुंठा क़ो जन्म दे रहा है.2014 में रूस के आंतरिक मंत्रालय ने बकायदा चेतावनी - पुस्तिका जारी की, बताया गया की सेल्फी जानलेवा हो सकती है. सेल्फी खींचने वालों से कहा गया है कि वे हथियारों, पहाड़ों से निकली चट्टानों, किसी किनारे या बाहर निकले हिस्से, खतरनाक जानवर, ट्रेन या बिजली के तारों के इर्दगिर्द फोटो न खींचे. कई देशों में कुछ चिड़ियाघरों क़ो इसलिए बंद करना पड़ा है क्योंकि लोग भालू या दूसरे जानवरों के साथ दौड़ लगाते हुए सेल्फी खींचने लगे थे. कई स्थानों पर सेल्फी लेने पर प्रतिबंध लगाना शुरू हो चुका है. हाल में सम्पन्न दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन सिंहस्थ कुम्भ मेले में कुछ जगहों पर सेल्फी लेना प्रतिबंधित कर दिया गया था. इन जगहों पर ' नो सेल्फी जोन ' लिखे पोस्टर लगाए गए और इस प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करवाया गया ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके. खेल प्रतियोगिताओं के दौरान भी सेल्फी खींचने क़ो लेकर ज्यादा ढील नहीं दी जा रही है. प्रतिष्ठित टेनिस प्रतियोगिता विम्वल्ड़न के दौरान ' सेल्फी स्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.' सेल्फी स्टिक धातु की बनी चालीस इंच तक लम्बी स्टिक होती है जिससे स्मार्ट फोन या कैमरे क़ो जोड़कर फोटो खींची जा सकती है. कुछ समय पहले अमेरिका के न्यूयार्क शहर के संग्रहालयों में भी कलाकृतियों और पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर सेल्फी स्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया. न्यूयार्क में बीते साल ' टाइगर सेल्फी ' नाम का विधेयक पास कर वहाँ की प्रांतीय विधानसभा ने क़ानून बना दिया है, जिसके तहत शेर - चीते जैसे बड़े खतरनाक जानवरों क़ो छूने और उनके साथ बिना किसी अवरोध के तस्वीर खिंचाने पर प्रतिबंध है. दुनिया भर में मनोरंजन पार्क चलाने वाले डिजनी वर्ल्ड ने भी सेल्फी स्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है.शिवाजी चौधरी, प्रधान सम्पादक, अनुराग भारत मीडिया ग्रुप, सम्पर्क : 9334375496
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