डीए मामलों में सावधानी से तैयार करें आरोप पत्र : दीपक कुमार सिंह
सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने कहा कि आय से अधिक संपत्ति मामलों में किसी भी सरकारी सेवक के खिलाफ आरोप-पत्र के गठन में गंभीरता बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में यह आरोप पत्र दो कंडिकाओं में ही सीमित रहते हैं, जबकि नियमानुसार सरकारी सेवकों के लिए संपत्ति अर्जित करने और अपनी संपत्ति का सरकार को प्रतिवेदन देने से संबंधित नियमों का उल्लंघन ही अनुशासनिक कार्रवाई का आधार बनता है।
श्री सिंह बुधवार को दशरथ माझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में बिहार प्रशासनिक-बिहार भारतीय प्रशासनिक और बिहार सचिवालय सेवा से इतर राजधानी पटना में पदास्थापित विभागों के अन्य सेवा संवर्गों के पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। वह यहां आयोजित अनुशासनिक कार्रवाई संबंधी उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीजर लिस्ट में सरकारी सेवक के मौजूदा और पुरानी संपत्ति की घोषणा, अचल संपत्ति अर्जित करने के लिए बने नियमों का अनुपालन जरूरी है। किसी भी संचालन कर्ता को यह देखना जरूरी होगा कि अचल संपत्ति बनाने के क्रम में सरकारी सेवक को कहां-कहां सरकार से अनुमति लेने की जरूरत है और कहां सूचना देने का अधिकार उसे प्राप्त है। इस क्रम में अगर सरकारी सेवक ने कहीं भी नियम तोड़ा है तो यह अनुशासनिक कार्रवाई का दूसरा आधार बनेगा।
इस अवसर पर मुख्य जांच आयुक्त ने बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की बारीकियों से प्रशिक्षण में शामिल सभी पदाधिकारियों को रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवक के खिलाफ किसी भी प्रकरण के संचालन और प्रस्तुतीकरण से पहले सभी पदाधिकारी उपलब्ध कराई गई पुस्तक में उल्लेखित नियमों का अध्ययन करें।
प्रशिक्षक के तौर पर मौजूद सतीश तिवारी ने अनुशासनिक कार्रवाई के लिए आवश्यक शब्दों में बदलाव, आरोप पत्र का गठन, अनुशासनिक कार्यवाही और कार्रवाई के बीच के अंतर, सरकारी सेवक के पदोन्नति रोकने संबंधी आवश्यक शर्तों के साथ-साथ आर्टिकल 310, 311 की बारीकियों से भी पदाधिकारियों को अवगत कराया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव प्रभात कुमार, संयुक्त सचिव अमरेश कुमार अमर, शालिग्राम पांडेय आदि की उपस्थिति रही।
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