किसान आंदोलन के अग्रदूत थे स्वामी सहजानंद सरस्वती : प्रो.बलिराज ठाकुर

किसान आंदोलन के अग्रदूत थे स्वामी सहजानंद सरस्वती : प्रो.बलिराज ठाकुर

आरा। किसान आंदोलन के प्रणेता एवं महान समाज सुधारक स्वामी सहजानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर एसबी कॉलेज परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी सहजानंद सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। समारोह की अध्यक्षता गणित विभागाध्यक्ष डॉ. एम.के. गिरी ने की, जबकि मुख्य अतिथि भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के सीनेटर प्रो. बलिराज ठाकुर उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में प्रो. बलिराज ठाकुर ने स्वामी सहजानंद सरस्वती को भारतीय किसान आंदोलन का अग्रदूत और जनक बताते हुए कहा कि उन्होंने किसानों के अधिकारों की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी के महान क्रांतिकारी नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती का जीवन त्याग, संघर्ष और सामाजिक न्याय का अनुपम उदाहरण है। नियति ने उन्हें संन्यास के मार्ग पर अग्रसर किया, लेकिन उन्होंने संन्यासी जीवन को समाज और किसानों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
प्रो. ठाकुर ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती भारतीय समाज, संस्कृति और परंपरा के गहन अध्येता थे। उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ जमींदारी प्रथा और किसानों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ भी सशक्त आंदोलन चलाया। उनके भाषणों में क्रांति की चिंगारी होती थी, जो शोषित और वंचित वर्गों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती थी। उन्होंने कहा कि आज भी स्वामी सहजानंद के विचार किसानों और युवाओं के लिए समान रूप से प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. कुमारी प्रियंका भारती, डॉ. धनंजय प्रसाद राय, डॉ. उमेश कुमार राय, डॉ. राधिका रमण सिंह, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पंकज कुमार, रमेश राय, कृष्ण कुमार भास्कर, राजीव, कृष्णा यादव तथा धर्मेंद्र सिंह सहित अनेक शिक्षकों और गणमान्य लोगों ने स्वामी सहजानंद सरस्वती के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमेश कुमार राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुमारी प्रियंका भारती ने प्रस्तुत किया। श्रद्धांजलि सभा का समापन स्वामी सहजानंद सरस्वती के बताए मार्ग पर चलने और किसानों के हितों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।

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