बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के शिल्पकार एवं प्रमुख संगठनकर्ता प्रो. यशवंतराव (बसंत राव) केलकर जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया

बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के शिल्पकार एवं प्रमुख संगठनकर्ता प्रो. यशवंतराव (बसंत राव) केलकर जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया

बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के शिल्पकार एवं प्रमुख संगठनकर्ता प्रो. यशवंतराव (बसंत राव) केलकर जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।

उन्होंने कहा कि प्रो. यशवंतराव (बसंत राव) केलकर जी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार, दूरदर्शी चिंतक, विलक्षण संगठनकर्ता और राष्ट्रनिष्ठ शिक्षाविद् थे।
उन्होंने केवल एक संगठन का निर्माण नहीं किया, बल्कि ऐसे राष्ट्रभक्त, चरित्रवान और समाजोन्मुख युवाओं की पीढ़ी तैयार करने का कार्य किया, जिन्होंने शिक्षा, समाज, प्रशासन, राजनीति, विज्ञान, न्याय, साहित्य और राष्ट्र-निर्माण के विविध क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के अमर संदेश उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत, को विद्यार्थी जीवन का मंत्र बनाया। उन्होंने विद्यार्थी परिषद को केवल छात्र-संगठन नहीं रहने दिया, बल्कि उसे राष्ट्र चेतना का व्यापक आंदोलन बनाया। उन्होंने संगठन की कार्यपद्धति में अनुशासन, आत्मीयता, वैचारिक स्पष्टता और सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया। वे मानते थे कि संगठन का वास्तविक बल पदों में नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के संस्कार, समर्पण और चरित्र में निहित होता है। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी परिषद ने शिक्षा सुधार, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सामाजिक समरसता, सेवा कार्यों, पर्यावरण संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास किया। आज देश के अनेक प्रतिष्ठित क्षेत्रों में कार्यरत असंख्य व्यक्तित्व उनके विचारों और संगठनात्मक संस्कारों से प्रेरित हैं। सीमित संसाधनों में उन्होंने अथक परिश्रम, संवाद और सतत प्रवास के माध्यम से विद्यार्थी परिषद को देश के सबसे बड़े छात्र संगठनों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज जब भारत अमृतकाल की यात्रा पर अग्रसर है, तब आवश्यकता है कि हमारे युवा ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, तकनीक के साथ नैतिकता और अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी अपनाएँ। यही बसंत राव केलकर जी के जीवन का मूल संदेश था।

हम सबका दायित्व है कि उनके आदर्शों को केवल स्मरण न करें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारें। राष्ट्र प्रथम, समाज सर्वोपरि और विद्यार्थी शक्ति—राष्ट्र शक्ति की भावना को आत्मसात करें।

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