भक्ति, प्रकृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक है सावन - बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार
बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने समस्त प्रदेशवासियों को पवित्र और अनंत ऊर्जा के प्रतीक पावन श्रावण मास के शुभारंभ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने सावन मास के धार्मिक, पौराणिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में श्रावण मास को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह मास केवल उपासना का काल नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवमात्र के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महापर्व है। पौराणिक कथाओं में वर्णित समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर 'नीलकंठ' कहलाने वाले भगवान शिव को यह मास अत्यंत प्रिय है। धारण विष की तीव्र उष्णता को शांत करने के लिए देवी-देवताओं और प्रकृति ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। तभी से सावन मास में भगवान शिव को जल अर्पित करने की सनातन परंपरा चली आ रही है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सावन आत्म-शुद्धिकरण, संयम और साधना का काल है, जो विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संतुलन सिखाता है। इस मास में प्रकृति अपने सबसे जीवंत रूप में होती है, जो हमें वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। साथ ही, कांवर यात्रा के दौरान जाति और पंथ के बंधनों से ऊपर उठकर लाखों शिवभक्तों का गेरुआ वस्त्रों में 'बोल बम' के जयकारों के साथ आगे बढ़ना हमारी सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की अमिट पहचान है।
उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से प्रार्थना की कि यह पावन मास सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।
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