खेत बचाओ अभियान' से बदलेगी खेती की तस्वीर और किसानों की तकदीर : मंत्री

खेत बचाओ अभियान' से बदलेगी खेती की तस्वीर और किसानों की तकदीर : मंत्री

राज्य में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 'खेत बचाओ अभियान' शुरू किया गया है, जो 30 जून तक चलेगा। सोमवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन से राज्य के माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना के सैकड़ों किसानों की मौजूदगी में इसका शुभारंभ किया। इस दौरान कृषि मंत्री सहित सभी किसानों ने संकल्प लिया कि वे अपने खेत का 25 फीसदी, यानी एक चौथाई भूमि पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत करेंगे।
      इस मौके पर माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि आज नए अध्याय का शुभारंभ हो रहा है। पटना की धरती से एक ऐसी क्रांति का शंखनाद हो रहा है जो हमारे खेतों की तस्वीर और किसानों की तकदीर दोनों को बदलेगा। इस अभियान के तहत रसायनों के जहर से धरती की कोख को बचाना है। प्राकृतिक खेती अपनाकर हमें अपने परिवार को स्वस्थ बनाना है।
      उन्होंने कहा कि गोबर, गोमूत्र और बीजामृत से जो फसल लहलहाती है, वही थाली में खुशबू और तन-मन में ऊर्जा लाती है। रसायन और उर्वरक खेत में पोषक तत्व घटाते हैं और बीमारियों को बढ़ाते हैं। मिट्टी जांच से यह बात सामने आ रही है कि रसायन और उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से भयावह स्थिति उत्पन्न हो रही है। मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है। 'खेत बचाओ अभियान' न सिर्फ मिट्टी बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।
     कृषि मंत्री ने कहा कि इस अभियान का मंत्र है 'सही खाद और सही सलाह'। हम मनमर्जी से उर्वरक डालना बंद करें। अपने खेत का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं और जरूरत के अनुसार ही खाद का प्रयोग करें। इससे न सिर्फ खेती की लागत कम होगी, बल्कि किसानों की आय में भी तेजी से वृद्धि होगी।
     इस मौके पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि जंगल में न खाद डाला जाता है और न पानी, लेकिन प्राकृतिक रुप से पेड़-पौधे की पत्तों से खाद मिलता है और जंगल के पेड़ों में पोषक तत्वों की कोई कमी नहीं होती है। इसलिए जरूरत है कि प्राकृतिक तरीके से खेती हो और उर्वरकों का कम से कम इस्तेमाल किया जाए।
     इस मौके पर कृषि विभाग और इससे जुड़ें संस्थानों के कृषि वैज्ञानिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्राकृतिक खेती और इस अभियान को लेकर हुई तैयारियों को के बारे में विस्तार से बताया।
*हर गांव-पंचायत तक चलेगा अभियान*
इस राष्ट्रीय अभियान को बिहार के प्रत्येक गांव और पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अभियान का मुख्य फोकस 'कम खाद, सही खाद और सही सलाह' के सिद्धांत को हर खेत तक पहुंचाना है, जिससे रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को रोका जा सके और खेती की लागत में कमी आए।
      अभियान के दौरान राज्यभर में मिट्टी की जांच पर विशेष बल दिया जाएगा। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही संतुलित उर्वरक डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही हरी खाद, प्राकृतिक खेती और बायो-प्रोडक्ट्स के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक सीधे खेतों पर जाकर व्यावहारिक सलाह देंगे। कम पानी वाली फसलों, फसल विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की लाइव जानकारी दी जाएगी।

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